Aug 6, 2015

बड़े चलो

नदियों को मोड़ने, पर्वतों को तोड़ने,
भीषण प्रवाह मे, इस धरा की राह मे,
चल पड़ा है शूरवीर स्वतंत्रता की चाह मे,
बड़े चलो बड़े चलो मातृभूमि की राह मे,
त्याग से, भक्‍ति से, रक्त से, शीश से आरती उतार लो,
भय ना हो ना मोह हो, नाहीं सुखों की चाह हो,
आत्मसात कर चलो, इससे मिलो उससे मिलो,
भाई भाई का ना शत्रु हो, सबसे तुम गले मिलो,
शक्ति की कमी नहीं, यह भी करो वह भी करो,
स्वाभिमान खो रहा अधोपतन है हो रहा,
उठो जागो हे शूरवीर, देश तुझपे रो रहा,
आज तुम जो सोये रहे, देश क्या बनाओगे,
भ्रष्टाचार के प्रहार से कैसे ही बच पाओगे,
क्रंदन करती ये मातृभूमि, तुमको ही पुकारती,
कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम, आंखे वो तरेरती,
समय शरीर संपदा, जिसने तुझपे वार दिया,
आन-बान-शान मे, तुमने उसको भी भुला दिया,
वक़्त अब भी गया नहीं, खुदको तुम सम्हाल लो,
मातृभूमि की राह मे, बड़े चलो बड़े चलो.