Aug 6, 2015

बड़े चलो

नदियों को मोड़ने, पर्वतों को तोड़ने,
भीषण प्रवाह मे, इस धरा की राह मे,
चल पड़ा है शूरवीर स्वतंत्रता की चाह मे,
बड़े चलो बड़े चलो मातृभूमि की राह मे,
त्याग से, भक्‍ति से, रक्त से, शीश से आरती उतार लो,
भय ना हो ना मोह हो, नाहीं सुखों की चाह हो,
आत्मसात कर चलो, इससे मिलो उससे मिलो,
भाई भाई का ना शत्रु हो, सबसे तुम गले मिलो,
शक्ति की कमी नहीं, यह भी करो वह भी करो,
स्वाभिमान खो रहा अधोपतन है हो रहा,
उठो जागो हे शूरवीर, देश तुझपे रो रहा,
आज तुम जो सोये रहे, देश क्या बनाओगे,
भ्रष्टाचार के प्रहार से कैसे ही बच पाओगे,
क्रंदन करती ये मातृभूमि, तुमको ही पुकारती,
कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम, आंखे वो तरेरती,
समय शरीर संपदा, जिसने तुझपे वार दिया,
आन-बान-शान मे, तुमने उसको भी भुला दिया,
वक़्त अब भी गया नहीं, खुदको तुम सम्हाल लो,
मातृभूमि की राह मे, बड़े चलो बड़े चलो.

Jul 16, 2012

Search

silence kills, crowd doesn't leave you either,
confused mind wonders hither and thither,
whom to approach, everything around smothers
peace is in pieces, no one to hold it together,
the wisdom looks fake and scriptures petrify
soul needs love and a path to purify
the path which will bring the peace and love
no hatred no violence, something which is all-above
soul is searching tirelessly from the eternity,
guru where are you I want to see your divinity.

Aug 7, 2010

Holding moments














Saw a droplet on the leaf, waiting for the right moment,
to get separated and to be united with rest, yet so ignorant.

What would that leaf be thinking, while the droplets grope,
and the tiny sprinkles take shape of a amorphous drop.

I am the one, gave the holding ground, for it to take shape,
I am the one, took the pain for, until it came to existence.

Why should it leave me now, and leave me in a bad taste,
stay with me forever, take notice of my behest.

Aug 6, 2010

अर्चना













हे
शक्ति हे भोले भगवन, किस विधि करें हम तेरा अर्चन।
तम-मन-धन सब जुझाको अर्पण, दे भक्ति तू ज्ञान का दर्पण।

रूप तेरा विस्तृत कण-कण, लीला तेरी अद्भुत क्षण-क्षण।
इस सृष्टि का तू है विधाता, हम हैं भिक्षुक तू है दाता।

अस्तित्व












अपना
अस्तित्व उनमें खोज रहा हूँ,
शायद अपनी हदें सही पहचानता हूँ।

बहुत सोचा ये करूँ, और अपना हाथ आगे किया,
लेकिन हर बार की तरह अकर्मण्यता ने ही साथ दिया।

पता नहीं कब दैनिक स्वप्न से बाहर निकलूंगा,
और अपने हांथों से ही अपनी किस्मत लिखूंगा।

परन्तु इसके सुख को त्यागना इतना आसन नहीं है,
क्योकि इसकी छाया में कोई धुप से परेशान नहीं है।

सब जानते है आलस्य अकर्मण्यता का लंगोटिया यार है,
लेकिन जिसे इससे प्यार, उसकी किस्मत में अकर्मण्यता की मार है।

आलस्य आत्मा-नियंत्रण की कमी की पहचान है,
बड़े से बड़ा मनुष्य इसकी पकड़ से अनजान है।

जिसने इसे त्यागा, उसका भाग्य जगा।

आत्मा-नियंत्रण पुरुषत्व की संतिति है,
इसका ज्ञानी जो, उसकी प्रबल मति है।

अज्ञानता, आत्म-उद्दंडता का मित्र है,
इसकी घनिष्टता अजानी अटल और विचित्र है।

तो मित्रों ज्ञान बढाओ और आत्मा संकलन करो,
आत्मा-नियंत्रण से अपने पुरुषत्व की पहचान करो।

पुरुषत्व ही अकर्मण्यता की मुक्ति है,
और यही मनुष्य की सत्य शक्ति है।

परन्तु ज्ञान कहाँ है, कहाँ इसका दर्शन सुनिश्चित है,
इसका ज्ञान पाना ही कठिन है और कल्पना अनिश्चित है।

संतो से सुना है, और अपने अनुभव से बतलाता हूँ,
ज्ञान अंतर्मन में है, और यह ज्ञान ही मैं जताता हूँ।

तो उठो और अन्तेर्मन को जानो, अपने आप को पहचानो,
सृजन करो अपनी सृष्टि का और अपना अस्तित्व जानो।

स्वप्न्दत्ता
















मैंने अपने ख्वाबों की परछाई तुझमें देखि है।
तेरा शर्माना, तेरी वो हंसीं कितनी अनोखी है।

तेरी नशीली आँखें और तेरा वो झुका चेहरा।
तेरी मीठी बांते या उनमें हो कोई राज़ गहरा।

तेरी नजदीकी से एक सिहरन सी दौड़ जाती है।
जैसे की तू खुशियौं की सौगात लिए आती है।

तेरा पास आना चेहरे को झुकाकर वो मुस्कुराना,
जैसे ताज़गी भरा बारिश का वो मौसम सुहाना।

तेरे गुलाब की पंखडियों से गुलाबी होंठ,
मन मचलता है कर जाते हैं ये मीठी सी चोट।

उफ़ ! तेरा ये बदन लगता है की तू सितारों से उतारी है,
या सागर की भटकती हुई जलपरी है।

तेरी ये चाहत ही मेरे जीने का सहारा है।
तुझसे ज्यादा इस ज़मीन पर कोई और प्यारा है।

तेरा अक्स जब तलक दिल में है, ये दिल धड़कता है।
हर पल हर लम्हा तेरी मौजूदगी को तडपता है।

तेरे बगैर इस दीवाने का वज़ूद ही क्या है।
झूठ नहीं कहता, देख उपर ये खुदा गवाह है।

हसीं हमसे प्यार की एक तलब गुफ्तगू तो कर।
कहीं दो लब्ज़ों के इंतज़ार में ये ज़िन्दगी जाये गुज़र।

ये साकी रह जाये तेरे प्यार का प्यासा।
कभी अपने इन लबों से शराब पिला कर तो देख।

कितनी चाहत भरी है तेर लिए इस दिल में,
कभी इस दिल में एक खंज़र उतार केर तो देख।

मिट जायेंगे, कुर्बान कर देंगे जान तेरे प्यार में।
कभी एक बार काबिल समझ और आज़मा केर तो देख।

साईकिल की सवारी












साईकिल की सवारी, जब दूसरे करते हैं तो लगती है प्यारी।
वरन स्वयं चलायें तो लगती है बेगारी।

अरे साहब ! साइकिल चलाना कोई आसान काम नहीं है।
जो इसका पूर्ण नियंत्रण जानता है, सच्चा वीर वही है।

ज़माने पहले की बात है, मन में आया साईकिल चलाना सीखें।
साईकिल चला स्वावलंबी बने और टाँगे की सवारी पर दिखें।

टाँगे के पैसे भी बचेंगे और साईकिल पर हम खूब जचेंगे।
टाँगे का इंतजार भी करना पड़ेगा और फिट भी रहेंगे।

इसी धुन में हम चल दिए अपने वाहन की खोज में।
सोचा की काश हमें भी मिल जाता ये वाहन दहेज़ में।

इसी उधेड़बुन में एक साईकिल की बड़ी दुकान दिख गई।
भिन्न-भिन्न मॉडल देखकर हमारी भी आँखे रुक गई।

दुकानदार से हमने फिर मॉडलों के दाम की तक़रीर की।
कुछ समय बात लगा शायद हमें दुकान ढूंढनी पड़े फ़कीर की।

फिर ध्यान आया और हमने जगडू की दुकान को रुख किया।
साहब, इस शहर मैं जगडू की विज्ञान ने कईयों को सुख दिया।

विनम्रता पूर्वक हमनें जगडू से अपने लिए वाहन का निवेदन किया।
जगडू ने भी हमारे निवेदन में अपना वरद-हस्त संवेदन दिया।

और कहा कल सुबह आयियें और अपने वाहन पर विहार कीजिये।
आहा! कितना सुखद और सुलभ जगडू का विज्ञान देखिये।

पहुँच गए प्रातः जगडू जी से वाहन का वरदान माँगने।
देख सुचलित वाहन को लगा हमारा भी स्वाभिमान जागने।

पैसों की कामाजोर के बाद ले आय अद्भुत वाहन को घर।
पुष्पांजलि अर्पित कर अपने भावी सेवक को विश्राम दिया उसी पहर।

जब निद्रान्दित हुए तो देखा हम साईकिल पर गगन विहार कर रहे हैं।
और साडी दुनियावाले हमें बड़े सम्मान के साथ स्तुति कर रहे हैं।

हम मामूली क्लर्क से साइकलेश्वर स्वामी बन चुके थे।
उफ़ ! स्वप्न टूटा और देखा घड़ी में बज चुके थे।

Miss Billy















I am the queen, I am the Billi..
touch me not, am red hot chilly..
if u gonna tell me, what to do..
only thing you'll get is, boo..boo..boo..
No, NOTHING, not in my dictionary..
Yes and Yes is, my motto primary..
I am terrorist, a bomb of questions..
tease me not, will give weird expressions..
u got to be smart, u got to be witty..
if u can't answer me, i really pity..
if u nice, will be your-sweet-kitty..
pinch me not, am danger-panther-gritty..
ha ha ha..he he he..hay hay hay..ho ho ho..
thanks for making me laugh, now i got to go..

ट्रेन की यात्रा











ट्रेन की यात्रा में कई तरीके के इंसान मिलते हैं,
कोई बिहारी, कोई मद्रासी, कई सिख तो कई मुसलमान मिलते है।

कोई कृशकाय सीकड़ा तो कई रेशमा पहलवान होते हैं।
कई भोले भले इंसान, तो कई आतंकी जान होते हैं।

कईयों का तो पूरा सफ़र ही टाइम पास की फिराक में निकल जाता है।
तो कईयों का तास की गड्डियां ले जमावड़ा खड़ा हो जाता है।

कई तो इतने सोते हैं कि कुम्भकर्ण से competition हो,
और कई तो रात के उल्लुओं कि तरह पूरी यात्रा काट देतें हैं।

और कहीं खाने कि बात हो तो मारवाड़ियों का जवाब नहीं।
सारे बर्तन निकालेंगे और व्यंजन इतने कि जिनका हिसाब नहीं।

भाई यात्रा का कोई आनंद जो ये व्यक्ति लेना जानतें हों।
घर के सारे सुख कोई मज़ाल ये ट्रेन में भोगतें हों।

अजी अगर अलग-अलग मौसमों में सफ़र करें तो,
यात्रा का मज़ा भी अलग-अलग ही मिलता है.

अगर मोंसम हो गर्मी का और यात्री हो दूसरे दर्जे की बोगी का।
फिर तो मत पूछिए हाल, जैसे गधा हो गरीब धोबी का।

बेचारा मर जाता है अंडे की तरह उबल कर।
और प्रण लता है कि यात्रा इससे तो करूँगा भूल कर।

पर क्या करें मध्यम वर्ग के व्यक्ति कि होती है मेमोरी वीक।
अगली बार यात्रा के लिए फिर से लेता है दूसरे दर्जे कि सीट।

निरंतर, पतझड़ फिर बसंत












एक-एक पत्ता साथ छोड़ जाता है, पेड़ खड़ा है वहीँ खड़ा रह जाता है।
आती हैं शाख पर फिर पत्तियां नई, बनते बन जाती है फिर कहानियां कई।

बारिश धूप आँधियों की मार सह लेता है फिर भी वो कई बार,
पर इन बिखरी पत्तियों को कैसे समेटे, खड़ा बस सोचता रह जाता है बार बार।

कोई अपना ही होता है जो इन पत्तियों के कूड़े को बुहार कर मेहरबानी करता है।
वरना तो पेड़ खड़ा फिर बारिश और हवाओं के थपेड़ों का इंतज़ार करता है।

सोचता है आएगी हरियाली फिर से नई, जी लेंगे ख़ुशी में उसके साथ।
पर वो भूलता नहीं इस बार की खुशियों का होगा कुछ महीनों का ही साथ।

पतझड़ फिर बसंत, जीवन का भी कुछ इसी तरह का ही है हिसाब,
कभी बना दिया जाता हूँ फ़कीर और कभी नवाबों का नवाब।

Aug 5, 2010

A friend, beyond friend



Some people just go unnoticed, until they depart.
Some get noticed unnecessarily, until they are found futile.
Some you don't have to notice, they are your part,
These are friends, expressing themselves through us smile.

Someone who desert you, so could stand on your own,
Someone who rubs against, so you can be better than you shone.

Never afraid of showing you, your true face.
even if there is a chance, you might efface.

Cries and weeps for you, when you are hurt.
Will never show his hurt, when you blurt.

Jun 28, 2009

Recounting on Guilt















जीवन की आपाधापी में, मैं उनसे मिलना भूल गया।
चलना जिसने सिखलाया था, मैं उनके साथ ही चल सका।
चले कई थे साथ मेरे, पर साथ किसी का मिला नही।
साया था जिनका सदा साथ, मैं उनका साया बन सका।
हाथ उसी को बढ़ता था, जीवन में जिसने साथ न दिया।
जीवन भर जिसने साथ दिया, मैं उसका साथ निभाना भूल गया।
अब कोई नहीं मेरे आगे, और कोई नहीं मेरे पीछे,
जीवन की भूल भुलैया में, साथ मैं उनको लेना भूल गया।
करता था कितने वादे मैं, बोली थी कितनी बातें भी।
मैं ऐसा तुमको कर दूंगा, मैं वैसा तुमको ले दूंगा।

Jun 12, 2009

The odd on the shores














25th Dec 2008


they are coming as demons towards me,
to destroy my existence to take away my life from me.
is that me standing right there to fight against
the odds to see a man developing with in me.
inevitable can not be avoided, it has to be seen and
experienced whether surficial or within.
just be wise and don't wait impatiently for the best to come,
rather let the process begin.
to get stronger you got to go against the wind to see how far
you can withstand and survive.
to see whether your will is stronger or their demonizing desires,
there is sea just dive.
don't think how deep it is or how long you got to swim before
you have chance to swim back alive,
don't think whether you are capable to scale the depth or
you will get buried deep down under the sea.

Fighting the odds












24 December 2008
walking lone on the shore,
my heart aches for a companion,
my destiny smiles and galore,
loner you will be stronger and champion,
she has gone not far from you,
will come back one day, out of a blue,
will hug you and kiss your hand,
and say! was waiting to see you fight and stand.
not afraid of any thing around,
but ever stronger and sound.
waiting to see you, becoming man,
not weak, got to loose you again.

Phoenix - Striving for the lost pride













Started on May 24, 2009 : in progress


Seen what not, on the life’s (struggling) stride,
Shattered all over was my pride.
Rules I followed, didn't want to abide,
Preferences of mine were kept aside,
Deadly impacts from all over, tide by tide,
Life within me out of breath finally died.

Now the phoenix is raising, stretching its wings,
opening its eyes, love around and nothing to cringe,
the whole world is mine, its me who is all around,
nothing is separate, that's the new meaning I found,

I am destined to go higher and higher.
says my soul, not just a fancied desire.
whatever it takes, whatever it breaks.
let it be that way, even the whole earth shakes.

It will be done for the higher cause and it will be like that.
I am just a face of divine, don't claim be a messiah or a prophet.
not seeking for the glory, for whatever is being done through me,
cause i am neither a doer nor a proprietor of the services.