
जीवन की आपाधापी में, मैं उनसे मिलना भूल गया।
चलना जिसने सिखलाया था, मैं उनके साथ ही चल न सका।
चले कई थे साथ मेरे, पर साथ किसी का मिला नही।
साया था जिनका सदा साथ, मैं उनका साया बन न सका।
हाथ उसी को बढ़ता था, जीवन में जिसने साथ न दिया।
जीवन भर जिसने साथ दिया, मैं उसका साथ निभाना भूल गया।
अब कोई नहीं मेरे आगे, और कोई नहीं मेरे पीछे,
जीवन की भूल भुलैया में, साथ मैं उनको लेना भूल गया।
करता था कितने वादे मैं, बोली थी कितनी बातें भी।
मैं ऐसा तुमको कर दूंगा, मैं वैसा तुमको ले दूंगा।
चलना जिसने सिखलाया था, मैं उनके साथ ही चल न सका।
चले कई थे साथ मेरे, पर साथ किसी का मिला नही।
साया था जिनका सदा साथ, मैं उनका साया बन न सका।
हाथ उसी को बढ़ता था, जीवन में जिसने साथ न दिया।
जीवन भर जिसने साथ दिया, मैं उसका साथ निभाना भूल गया।
अब कोई नहीं मेरे आगे, और कोई नहीं मेरे पीछे,
जीवन की भूल भुलैया में, साथ मैं उनको लेना भूल गया।
करता था कितने वादे मैं, बोली थी कितनी बातें भी।
मैं ऐसा तुमको कर दूंगा, मैं वैसा तुमको ले दूंगा।


